सत्य,प्रेम व एकत्व के भाव को समर्पित होगा 72 वां निरंकारी संत समागम



संत निरंकारी मिशन का 16, 17 एवं 18 नवंबर को हरियाणा के समालखा में होने वाली 72वें निरंकारी संत समागम के 65 देशों के निरंकारी श्रद्धालु भाग लेंगे।

वार्षिक निरंकारी संत समागम वर्ष 2018 तक दिल्ली के बाहरी रिग रोड बुराड़ी में होता था लेकिन निरंतर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से जगह का अभाव होने के कारण पिछले वर्ष से हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल के 600 एकड़ क्षेत्र में मिशन की सदगुरु सुदीक्षा जी महाराज के सानिध्य में 72 वें निरंकारी संत समागम हो रहा है।


 कार्यक्रम एंव रूपरेखा

संत समागम में तीनों दिन सत्संग होगा जिसमें विश्वभर के प्रसिद्ध वक्ता अपने विचार व्यक्त करेंगे, वहीं तीनों दिन सद्गुरु माता सुदिक्षा जी महाराज के आशीर्वचनों का लाभ भी भक्तों को मिलेगा।

 निरंकारी प्रदर्शनी विशेष आकर्षण

समागम में आध्यात्मिक निरंकारी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसमें मिशन की शिक्षाओं के साथ मिशन के इतिहास का सांझा रूप देखने को मिलेगा।


 संत समागम में कोमल होते हैं मन के भाव

निरंकारी संत समागम, दीवार रहित विश्व की सीख मिलती है व आध्यात्मिक वातावरण मिलता है, जिसका लाभ विश्वभर के संत-भक्त लेते हैं।

साथ ही जीवन का आधार क्या है, जन्म सफल कैसे हो, इसकी जानकारी संत समागम में बताई जाती है.
 वसुदैव कुटुम्बकम की परिभाषा निरंकारी संत समागम में कायम होती दिखती है, जहां मानवता का अनुठा संगम देखने को मिलता है।समागम पर संत-महात्माओं के संदेश और सद्गुरु के आशीर्वाद का एक साथ लाभ मिलता है।

 समागम की तैयारियां पूर्ण

संत समागम की तैयारियां ने अंतिम रूप ले लिया है।
समागम की तैयारियों में सेवा करने हेतु संपूर्ण भारतवर्ष  से सेवादार-भक्त समालखा में लगातार एक माह से तैयारियों में भागीदारी कर रहे हैं।

 श्रृद्धालुओं के लिए सुविधाएं

समागम स्थल पर सत्संग पण्डाल, आध्यात्मिक प्रदर्शनी, लंगर, केंटीन, डिस्पेंसरी तथा भक्तों को विविध सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले कई कार्यालय इत्यादि के अलावा बाहर से आने वाले भक्तों के सुविधापूर्वक निवास हेतु हजारों शामियाने लगाए गए हैं।

 मानवीय एकता का संगम-मुखी हरिकांत सिंह
स्थानीय मुखी श्री हरिकांत सिंह ने बताया कि विश्व के विभिन्न संस्कृति सभ्यताओं का संगम और मानवीय खुशबू से महकता मानवता का गुलदस्ता संत समागम में देखने को मिलेगा।

सत्संग की महिमा संत समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ दोय।सुत दारा अरु लक्ष्मी पापी घर भी होय।।

अर्थात् : प्पुत्र-पुत्री परिवार-पत्नी, धन-दौलत आदि तो पापी के घर भी हुआ करता है इसलिये यह बहुत बड़़ी बात नहीं है - अतः इसकी कोई खास मर्यादा नहीं है कि हमें तो कई पुत्र-पुत्री हैं, काफी सुन्दर पत्नी है, अपार धन-सम्पदा है। हम भरे-पूरे घर-परिवार वाले हैं। हम काफी धन-दौलत वाले हैं। हम सुखी-सम्पन्न हैं। हमको अब कोई परवाह नहीं है - कोई बात नहीं है। मगर सच तो यही है क़ि इन पुत्र-पुत्री घर-परिवार, धन-दौलत आदि सुखी-सम्पन्नता की कोई अहमियत नहीं है - कोई ही महत्ता नहीं है। महत्ता है संत दर्शन और समागम की - संत के साथ उठने-बैठने-रहने की एवं महत्ता है हरिकथा की।
मर्यादा-महत्ता है हरि चर्चा-भगवत् चर्चा की-सत्संग की, जो संत समागम से ही हो सकता है, इसीलिये इन दोनों- संत समागम और हरि कथा- को ही दुर्लभ बताया है।




रेल-प्रशासन का विशेष सहयोग

 समागम में श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने 5 नवम्बर से 30 नवम्बर तक उक्त रेलखंड पर गुजरने वाली सभी ट्रेनों का 3 मिनट के लिए भोड़वाल माजरी स्टेशन पर रोकने की स्वीकृति प्रदान किया है।

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